मूल श्लोक
सीदन्ति मम गात्राणि मुखं च परिशुष्यति ।वेपथुश्च शरीरे मे रोमहर्षश्च जायते ॥
लिप्यंतरण (रोमन)
sīdanti mama gātrāṇi mukhaṃ ca pariśuṣyati vepathuśca śarīre me romaharṣaśca jāyate
अनुवाद
अर्जुन ने कहा: मेरे गात्र शिथिल हो रहे है, मुँह सूख रहा है, शरीर में कँपकँपी उठकर रोएँ भी खड़े हो गए हैं;