मूल श्लोक
तत्रापश्यत्स्थितान्पार्थः पितॄनथ पितामहान् ।आचार्यान्मातुलान्भ्रातॄन्पुत्रान्पौत्रान्सखींस्तथा ॥
लिप्यंतरण (रोमन)
tatrāpaśyatsthitānpārthaḥ pitṝnatha pitāmahān ācāryānmātulānbhrātṝnputrānpautrānsakhīṃstathā
अनुवाद
तब अर्जुन को दिखाई दिया कि यहाँ पर इकट्ठे हुए सब (अपने ही) बड़े-बूढ़े, आजा, आचार्य, मामा, भाई, बेटे, नाती, मित्र,