मूल श्लोक
अपि चेत्सुदुराचारो भजते मामनन्यभाक् ।साधुरेव स मन्तव्यः सम्यग्व्यवसितो हि सः ॥
लिप्यंतरण (रोमन)
api cetsudurācāro bhajate māmananyabhāk sādhureva sa mantavyaḥ samyagvyavasito hi saḥ
अनुवाद
बड़ा दुराचारी ही क्यों न हो, यदि वह मुझे अनन्य भाव से भजता है तो उसे बड़ा साधु ही समझना चाहिए। क्योंकि उसकी बुद्धि का निश्चय अच्छा रहता है।