मूल श्लोक
राजविद्या राजगुह्यं पवित्रमिदमुत्तमम् ।प्रत्यक्षावगमं धर्म्यं सुसुखं कर्तुमव्ययम् ॥
लिप्यंतरण (रोमन)
rājavidyā rājaguhyaṃ pavitramidamuttamam pratyakṣāvagamaṃ dharmyaṃ susukhaṃ kartumavyayam
अनुवाद
यह (ज्ञान) समस्त गुह्यों में राजा अर्थात् श्रेष्ठ है; यह राजविद्या अर्थात् सब विद्याओं में श्रेष्ठ, पवित्र, उत्तम और प्रत्यक्ष बोध देनेवाला है; यह आचरण करने में सुखकारक, अव्यय और धर्म्य है।