मूल श्लोक
अर्जुन उवाच ।किं तद्ब्रह्म किमध्यात्मं किं कर्म पुरुषोत्तम ।अधिभूतं च किं प्रोक्तमधिदैवं किमुच्यते ॥
लिप्यंतरण (रोमन)
arjuna uvāca kiṃ tadbrahma kimadhyātmaṃ kiṃ karma puruṣottama adhibhūtaṃ ca kiṃ proktamadhidaivaṃ kimucyate
अनुवाद
अर्जुन ने कहा: हे पुरुषोत्तम! वह ब्रह्म क्या है? अध्यात्म क्या है? कर्म के मानी क्या है? अधिभूत किसे कहना चाहिए और अधिदैवत किसके कहते है?