मूल श्लोक
येषां त्वन्तगतं पापं जनानां पुण्यकर्मणाम् ।ते द्वन्द्वमोहनिर्मुक्ता भजन्ते मां दृढव्रताः ॥
लिप्यंतरण (रोमन)
yeṣāṃ tvantagataṃ pāpaṃ janānāṃ puṇyakarmaṇām te dvandvamohanirmuktā bhajante māṃ dṛḍhavratāḥ
अनुवाद
परन्तु जिन पुण्यात्माओं के पाप का अन्त हो गया है, वे (सुख-दुःख आदि) द्वन्द्वों के मोह से छुट कर दृढ़व्रत हो करके मेरी भक्ति करते है।
टिप्पणी
इस प्रकार माया से छुटकारा हो चुकने पर आगे उनकी जो स्थिति होती है उसका वर्णन करते हैं –
— Lokmanya Tilak