मूल श्लोक
सङ्कल्पप्रभावान्कामांस्त्यक्त्वा सर्वानशेषतः ।मनसैवेन्द्रियग्रामं विनियम्य समन्ततः ॥
लिप्यंतरण (रोमन)
saṅkalpaprabhāvānkāmāṃstyaktvā sarvānaśeṣataḥ manasaivendriyagrāmaṃ viniyamya samantataḥ
अनुवाद
संकल्प से उत्पन्न होनेवाली सब कामनाओं अर्थात् वासनाओं का निःशेष त्याग कर और मन से ही सब इन्द्रियों का चारों ओर संयम कर