भगवद्गीता

श्रीमद्भगवद्गीता ६.१३ ·

English

मूल श्लोक

समं कायशिरोग्रीवं धारयन्नचलं स्थिरः ।संप्रेक्ष्य नासिकाग्रं स्वं दिशश्चानवलोकयन् ॥

लिप्यंतरण (रोमन)

samaṃ kāyaśirogrīvaṃ dhārayannacalaṃ sthiraḥ saṃprekṣya nāsikāgraṃ svaṃ diśaścānavalokayan

६.१३अध्याय ६ · अध्यात्मयोग४७ में से श्लोक १३

अनुवाद

काय अर्थात् पीठ, मस्तक और गर्दन को सम करके अर्थात् सीधी खड़ी रेखा में निश्चल करके, स्थिर होता हुआ, दिशाओं को यानी इधर-उधर न देखे; और अपनी नाक की नोक पर दृष्टि जमा कर,

— Lokmanya Tilak

अध्याय ६, श्लोक ६.१३