मूल श्लोक
समं कायशिरोग्रीवं धारयन्नचलं स्थिरः ।संप्रेक्ष्य नासिकाग्रं स्वं दिशश्चानवलोकयन् ॥
लिप्यंतरण (रोमन)
samaṃ kāyaśirogrīvaṃ dhārayannacalaṃ sthiraḥ saṃprekṣya nāsikāgraṃ svaṃ diśaścānavalokayan
अनुवाद
काय अर्थात् पीठ, मस्तक और गर्दन को सम करके अर्थात् सीधी खड़ी रेखा में निश्चल करके, स्थिर होता हुआ, दिशाओं को यानी इधर-उधर न देखे; और अपनी नाक की नोक पर दृष्टि जमा कर,