भगवद्गीता

श्रीमद्भगवद्गीता ६.११ ·

English

मूल श्लोक

शुचौ देशे प्रतिष्ठाप्य स्थिरमासनमात्मनः ।नात्युच्छ्रितं नातिनीचं चैलाजिनकुशोत्तरम् ॥

लिप्यंतरण (रोमन)

śucau deśe pratiṣṭhāpya sthiramāsanamātmanaḥ nātyucchritaṃ nātinīcaṃ cailājinakuśottaram

६.११अध्याय ६ · अध्यात्मयोग४७ में से श्लोक ११

अनुवाद

योगभ्यासी पुरुष शुद्ध स्थान पर अपना स्थिर आसन लगावे, जो कि न बहुत ऊँचा हो और न नीचा, उस पर पहले दर्भ, फिर मृगछाला और फिर वस्त्र बिछावे;

— Lokmanya Tilak

अध्याय ६, श्लोक ६.११