मूल श्लोक
शुचौ देशे प्रतिष्ठाप्य स्थिरमासनमात्मनः ।नात्युच्छ्रितं नातिनीचं चैलाजिनकुशोत्तरम् ॥
लिप्यंतरण (रोमन)
śucau deśe pratiṣṭhāpya sthiramāsanamātmanaḥ nātyucchritaṃ nātinīcaṃ cailājinakuśottaram
अनुवाद
योगभ्यासी पुरुष शुद्ध स्थान पर अपना स्थिर आसन लगावे, जो कि न बहुत ऊँचा हो और न नीचा, उस पर पहले दर्भ, फिर मृगछाला और फिर वस्त्र बिछावे;