मूल श्लोक
यथैधांसि समिद्धोऽग्निर्भस्मसात्कुरुतेऽर्जुन ।ज्ञानाग्निः सर्वकर्माणि भस्मसात्कुरुते तथा ॥
लिप्यंतरण (रोमन)
yathaidhāṃsi samiddho'gnirbhasmasātkurute'rjuna jñānāgniḥ sarvakarmāṇi bhasmasātkurute tathā
अनुवाद
जिस प्रकार प्रज्वलित की हुई अग्नि (सब) ईंधन को भस्म कर डालती है, उसी प्रकार हे अर्जुन! (यह) ज्ञानरूप अग्नि सब कर्मों को (शुभ-अशुभ बन्धनों को) जला डालती है।
टिप्पणी
ज्ञान की महत्ता बतला दी। अब बतलाते है, कि इस ज्ञान की प्राप्ति कि उपायों से होती है –
— Lokmanya Tilak