मूल श्लोक
न कर्मणामनारम्भान्नैष्कर्म्यं पुरुषोऽश्नुते ।न च संन्यसनादेव सिद्धिं समधिगच्छति ॥
लिप्यंतरण (रोमन)
na karmaṇāmanārambhānnaiṣkarmyaṃ puruṣo'śnute na ca saṃnyasanādeva siddhiṃ samadhigacchati
अनुवाद
(परन्तु) कर्मों का प्रारम्भ न करने से ही पुरुष को नैष्कर्म्य-प्राप्ति नहीं हो जाती; और कर्मों का प्रारम्भ (त्याग) न करने से ही सिद्धि नहीं मिल जाती।