मूल श्लोक
यदि ह्यहं न वर्तेयं जातु कर्मण्यतन्द्रितः ।मम वर्त्मानुवर्तन्ते मनुष्याः पार्थ सर्वशः ॥
लिप्यंतरण (रोमन)
yadi hyahaṃ na varteyaṃ jātu karmaṇyatandritaḥ mama vartmānuvartante manuṣyāḥ pārtha sarvaśaḥ
अनुवाद
क्योंकि जो मैं कदाचित् आलस्य छोड़कर कर्मों ने बर्तूँगा तो हे पार्थ! मनुष्य सब प्रकार से मेरे ही पथ का अनुकरण करेंगे।