भगवद्गीता

श्रीमद्भगवद्गीता ३.२ ·

English

मूल श्लोक

व्यामिश्रेणेव वाक्येन बुद्धिं मोहयसीव मे ।तदेकं वद निश्चित्य येन श्रेयोऽहमाप्नुयाम् ॥

लिप्यंतरण (रोमन)

vyāmiśreṇeva vākyena buddhiṃ mohayasīva me tadekaṃ vada niścitya yena śreyo'hamāpnuyām

३.२अध्याय ३ · कर्मयोग४३ में से श्लोक २

अनुवाद

(देखने में) व्यामिश्र अर्थात् सन्दिग्ध भाषण करके तुम मेरी बुद्धि को भ्रम में डाल रहे हो! इसलिए तुम ऐसी एक ही बात निश्चित करके मुझे बतलाओ, जिससे मुझे श्रेय अर्थात् कल्याण

— Lokmanya Tilak

अध्याय ३, श्लोक ३.२