मूल श्लोक
अर्जुन उवाच ।ज्यायसी चेत्कर्मणस्ते मता बुद्धिर्जनार्दन ।तत्किं कर्मणि घोरे मां नियोजयसि केशव ॥
लिप्यंतरण (रोमन)
arjuna uvāca jyāyasī cetkarmaṇaste matā buddhirjanārdana tatkiṃ karmaṇi ghore māṃ niyojayasi keśava
अनुवाद
अर्जुन ने कहा: हे जनार्दन! यदि तुम्हारा यही मत है कि कर्म की अपेक्षा (साम्य-) बुद्धि ही श्रेष्ठ है, तो हे केशव! मुझे (युद्ध के) घोर कर्म में क्यों लगाते हो?