मूल श्लोक
सहयज्ञाः प्रजाः सृष्ट्वा पुरोवाच प्रजापतिः ।अनेन प्रसविष्यध्वमेष वोऽस्त्विष्टकामधुक् ॥
लिप्यंतरण (रोमन)
sahayajñāḥ prajāḥ sṛṣṭvā purovāca prajāpatiḥ anena prasaviṣyadhvameṣa vo'stviṣṭakāmadhuk
अनुवाद
आरम्भ में यज्ञ के साथ-साथ प्रजा को उत्पन्न करके ब्रह्मा ने (उनसे) कहा, 'इस (यज्ञ) के द्वारा तुम्हारी वृद्धि हो; यह (यज्ञ) तुम्हारी कामधेनु होवे अर्थात् यह तुम्हारे इच्छित फलों को देने वाला होवे।