मूल श्लोक
न हि प्रपश्यामि ममापनुद्याद्यच्छोकमुच्छोषणमिन्द्रियाणाम् ।अवाप्य भूमावसपत्नमृद्धं राज्यं सुराणामपि चाधिपत्यम् ॥
लिप्यंतरण (रोमन)
na hi prapaśyāmi mamāpanudyādyacchokamucchoṣaṇamindriyāṇām avāpya bhūmāvasapatnamṛddhaṃ rājyaṃ surāṇāmapi cādhipatyam
अनुवाद
क्योंकि पृथ्वी का निष्कंटक समृद्ध राज्य या देवताओं (स्वर्ग) का भी स्वामित्व मिल जाएँ, तथापि मुझे ऐसा कुछ भी (साधन) नहीं नजर आता कि जो इन्द्रियों को सुखा डालने वाले मेरे इस शोक को