मूल श्लोक
इन्द्रियाणां हि चरतां यन्मनोऽनु विधीयते ।तदस्य हरति प्रज्ञां वायुर्नावमिवाम्भसि ॥
लिप्यंतरण (रोमन)
indriyāṇāṃ hi caratāṃ yanmano'nu vidhīyate tadasya harati prajñāṃ vāyurnāvamivāmbhasi
अनुवाद
(विषयों मे) संचार अर्थात् व्यवहार करने वाली इन्द्रियों के पीछे-पीछे मन जो जाने लगता है, वही पुरुष की बुद्धि को ऐसे हरण किया करता है जैसे कि पानी में नौका को वायु खींचती है।