मूल श्लोक
अवाच्यवादांश्च बहून्वदिष्यन्ति तवाहिताः ।निन्दन्तस्तव सामर्थ्यं ततो दुःखतरं नु किम् ॥
लिप्यंतरण (रोमन)
avācyavādāṃśca bahūnvadiṣyanti tavāhitāḥ nindantastava sāmarthyaṃ tato duḥkhataraṃ nu kim
अनुवाद
ऐसे ही तेरे सामर्थ्य की निन्दा कर, तेरे शत्रु ऐसी-ऐसी अनेक बातें (तेरे विषय में) कहेंगे जो न कहनी चाहिए। इससे अधिक दुःखकारक और है ही क्या?