मूल श्लोक
यदृच्छया चोपपन्नं स्वर्गद्वारमपावृतम् ।सुखिनः क्षत्रियाः पार्थ लभन्ते युद्धमीदृशम् ॥
लिप्यंतरण (रोमन)
yadṛcchayā copapannaṃ svargadvāramapāvṛtam sukhinaḥ kṣatriyāḥ pārtha labhante yuddhamīdṛśam
अनुवाद
और हे पार्थ! यह युद्ध आप ही आप खुला हुआ स्वर्ग का द्वार ही है; ऐसा युद्ध भाग्यवान क्षत्रियों ही को मिला करता है।