मूल श्लोक
अच्छेद्योऽयमदाह्योऽयमक्लेद्योऽशोष्य एव च ।नित्यः सर्वगतः स्थाणुरचलोऽयं सनातनः ॥
लिप्यंतरण (रोमन)
acchedyo'yamadāhyo'yamakledyo'śoṣya eva ca nityaḥ sarvagataḥ sthāṇuracalo'yaṃ sanātanaḥ
अनुवाद
(कभी न) कटने वाला, न जलने वाला, न भीगने वाला और न सूखने वाला यह (आत्मा) नित्य, सर्व्यापी, स्थिर, अचल और सनातन अर्थात् चिरन्तन है।