मूल श्लोक
शमो दमस्तपः शौचं क्षान्तिरार्जवमेव च ।ज्ञानं विज्ञानमास्तिक्यं ब्रह्मकर्म स्वभावजम् ॥
लिप्यंतरण (रोमन)
śamo damastapaḥ śaucaṃ kṣāntirārjavameva ca jñānaṃ vijñānamāstikyaṃ brahmakarma svabhāvajam
अनुवाद
ब्राह्मण का स्वभावजन्य कर्म शम, दम, तप, पवित्रता, शान्ति , सरलता (आर्जव), ज्ञान अर्थात् अध्यात्मज्ञान, विज्ञान यानी विविध ज्ञान और आस्तिक्यबुद्धि है।