मूल श्लोक
बुद्धेर्भेदं धृतेश्चैव गुणतस्त्रिविधं शृणु ।प्रोच्यमानमशेषेण पृथक्त्वेन धनञ्जय ॥
लिप्यंतरण (रोमन)
buddherbhedaṃ dhṛteścaiva guṇatastrividhaṃ śṛṇu procyamānamaśeṣeṇa pṛthaktvena dhanañjaya
अनुवाद
हे धनंजय! बुद्धि और धृति के भी गुणों के अनुसार जो तीन प्रकार के भिन्न-भिन्न भेद होते है, इस सब को तुझसे कहता हूँ; सुन।