भगवद्गीता

श्रीमद्भगवद्गीता १८.११ ·

English

मूल श्लोक

न हि देहभृता शक्यं त्यक्तुं कर्माण्यशेषतः ।यस्तु कर्मफलत्यागी स त्यागीत्यभिधीयते ॥

लिप्यंतरण (रोमन)

na hi dehabhṛtā śakyaṃ tyaktuṃ karmāṇyaśeṣataḥ yastu karmaphalatyāgī sa tyāgītyabhidhīyate

१८.११अध्याय १८ · मोक्षसंन्यासयोग७८ में से श्लोक ११

अनुवाद

जो देहधारी है उसके कर्मों का निःशेष त्याग होना सम्भव नहीं है; अतएव जिसने (कर्म न छोड़कर) केवल कर्मफलों का त्याग किया हो, वही (सच्चा) त्यागी अर्थात् संन्यासी है।

— Lokmanya Tilak

टिप्पणी

अब यह बतलाते है कि उक्त प्रकार से अर्थात् कर्म न छोड़कर केवल फलाशा छोड़ करके जो त्यागी हुआ हो उसे उसके कर्म के कोई भी फल बन्धक नहीं होते–

— Lokmanya Tilak

अध्याय १८, श्लोक १८.११