मूल श्लोक
न हि देहभृता शक्यं त्यक्तुं कर्माण्यशेषतः ।यस्तु कर्मफलत्यागी स त्यागीत्यभिधीयते ॥
लिप्यंतरण (रोमन)
na hi dehabhṛtā śakyaṃ tyaktuṃ karmāṇyaśeṣataḥ yastu karmaphalatyāgī sa tyāgītyabhidhīyate
अनुवाद
जो देहधारी है उसके कर्मों का निःशेष त्याग होना सम्भव नहीं है; अतएव जिसने (कर्म न छोड़कर) केवल कर्मफलों का त्याग किया हो, वही (सच्चा) त्यागी अर्थात् संन्यासी है।
टिप्पणी
अब यह बतलाते है कि उक्त प्रकार से अर्थात् कर्म न छोड़कर केवल फलाशा छोड़ करके जो त्यागी हुआ हो उसे उसके कर्म के कोई भी फल बन्धक नहीं होते–
— Lokmanya Tilak