मूल श्लोक
मूढग्राहेणात्मनो यत्पीडया क्रियते तपः ।परस्योत्सादनार्थं वा तत्तामसमुदाहृतम् ॥
लिप्यंतरण (रोमन)
mūḍhagrāheṇātmano yatpīḍayā kriyate tapaḥ parasyotsādanārthaṃ vā tattāmasamudāhṛtam
अनुवाद
मूढ़ आग्रह से, स्वयं कष्ट उठा कर, अथवा (जारण-मारण आदि कर्मों के द्वारा) दूसरों को सताने के हेतु से किया हुआ तप तामस कहलाता है।
टिप्पणी
ये तप के भेद हुए। अब दान के त्रिविध भेद बतलाते है–
— Lokmanya Tilak