मूल श्लोक
सत्कारमानपूजार्थं तपो दम्भेन चैव यत् ।क्रियते तदिह प्रोक्तं राजसं चलमध्रुवम् ॥
लिप्यंतरण (रोमन)
satkāramānapūjārthaṃ tapo dambhena caiva yat kriyate tadiha proktaṃ rājasaṃ calamadhruvam
अनुवाद
जो तप (अपने) सत्कार, मान या पूजा के लिए अथवा दम्भ से किया जाता है, वह चंचल और अस्थिर तप शास्त्रों में राजस कहा जाता ह।