मूल श्लोक
एतैर्विमुक्तः कौन्तेय तमोद्वारैस्त्रिभिर्नरः ।आचरत्यात्मनः श्रेयस्ततो याति परां गतिम् ॥
लिप्यंतरण (रोमन)
etairvimuktaḥ kaunteya tamodvāraistribhirnaraḥ ācaratyātmanaḥ śreyastato yāti parāṃ gatim
अनुवाद
हे कौन्तेय! इन तीन तमोद्वारों से छूट कर, मनुष्य वही आचरण करने लगता है कि जिसमें उसका कल्याण हो; और फिर उत्तम गति पा जाता है।
टिप्पणी
प्रगट है कि नरक के तीनों दरवाजे छूट जाने पर सद्गति मिलनी ही चाहिए; किन्तु यह नहीं बतलाया कि कौन सा आचरण करने से ये छूट जाते हैं। अतः अब उसका मार्ग बतलाते है –
— Lokmanya Tilak