भगवद्गीता

श्रीमद्भगवद्गीता १६.२२ ·

English

मूल श्लोक

एतैर्विमुक्तः कौन्तेय तमोद्वारैस्त्रिभिर्नरः ।आचरत्यात्मनः श्रेयस्ततो याति परां गतिम् ॥

लिप्यंतरण (रोमन)

etairvimuktaḥ kaunteya tamodvāraistribhirnaraḥ ācaratyātmanaḥ śreyastato yāti parāṃ gatim

१६.२२अध्याय १६ · दैवासुरसम्पद्विभागयोग२४ में से श्लोक २२

अनुवाद

हे कौन्तेय! इन तीन तमोद्वारों से छूट कर, मनुष्य वही आचरण करने लगता है कि जिसमें उसका कल्याण हो; और फिर उत्तम गति पा जाता है।

— Lokmanya Tilak

टिप्पणी

प्रगट है कि नरक के तीनों दरवाजे छूट जाने पर सद्गति मिलनी ही चाहिए; किन्तु यह नहीं बतलाया कि कौन सा आचरण करने से ये छूट जाते हैं। अतः अब उसका मार्ग बतलाते है –

— Lokmanya Tilak

अध्याय १६, श्लोक १६.२२