मूल श्लोक
अहङ्कारं बलं दर्पं कामं क्रोधं च संश्रिताः ।मामात्मपरदेहेषु प्रद्विषन्तोऽभ्यसूयकाः ॥
लिप्यंतरण (रोमन)
ahaṅkāraṃ balaṃ darpaṃ kāmaṃ krodhaṃ ca saṃśritāḥ māmātmaparadeheṣu pradviṣanto'bhyasūyakāḥ
अनुवाद
अहंकार से, बल से, दर्प से, काम से और क्रोध से फूल कर अपनी और पराई देह में वर्तमान मेरा (परमेश्वर का) द्वेष करनेवाले, निन्दक,