भगवद्गीता

श्रीमद्भगवद्गीता १६.१५ ·

English

मूल श्लोक

आढ्योऽभिजनवानस्मि कोऽन्योऽस्ति सदृशो मया ।यक्ष्ये दास्यामि मोदिष्य इत्यज्ञानविमोहिताः ॥

लिप्यंतरण (रोमन)

āḍhyo'bhijanavānasmi ko'nyo'sti sadṛśo mayā yakṣye dāsyāmi modiṣya ityajñānavimohitāḥ

१६.१५अध्याय १६ · दैवासुरसम्पद्विभागयोग२४ में से श्लोक १५

अनुवाद

मैं सम्पन्न और कुलीन हूँ, मेरे समान और है कौन? मैं यज्ञ करूँगा, दान दूँगा, मौज करूँगा – इस प्रकार अज्ञान से मोहित,

— Lokmanya Tilak

अध्याय १६, श्लोक १६.१५