मूल श्लोक
आढ्योऽभिजनवानस्मि कोऽन्योऽस्ति सदृशो मया ।यक्ष्ये दास्यामि मोदिष्य इत्यज्ञानविमोहिताः ॥
लिप्यंतरण (रोमन)
āḍhyo'bhijanavānasmi ko'nyo'sti sadṛśo mayā yakṣye dāsyāmi modiṣya ityajñānavimohitāḥ
अनुवाद
मैं सम्पन्न और कुलीन हूँ, मेरे समान और है कौन? मैं यज्ञ करूँगा, दान दूँगा, मौज करूँगा – इस प्रकार अज्ञान से मोहित,