भगवद्गीता

श्रीमद्भगवद्गीता १३.९ ·

English

मूल श्लोक

इन्द्रियार्थेषु वैराग्यमनहङ्कार एव च ।जन्ममृत्युजराव्याधिदुःखदोषानुदर्शनम् ॥

लिप्यंतरण (रोमन)

indriyārtheṣu vairāgyamanahaṅkāra eva ca janmamṛtyujarāvyādhiduḥkhadoṣānudarśanam

१३.९अध्याय १३ · क्षेत्रक्षेत्रज्ञविभागयोग३५ में से श्लोक ९

अनुवाद

इन्द्रियों के विषयों में विराग, अहंकार-हीनता, और जन्म-मृत्यु-बुढ़ापा-व्याधि एवं दुःखों को (अपने पीछे लगे हुए) दोष-समझना;

— Lokmanya Tilak

अध्याय १३, श्लोक १३.९