भगवद्गीता

श्रीमद्भगवद्गीता १३.६ ·

English

मूल श्लोक

महाभूतान्यहङ्कारो बुद्धिरव्यक्तमेव च ।इन्द्रियाणि दशैकं च पञ्च चेन्द्रियगोचराः ॥

लिप्यंतरण (रोमन)

mahābhūtānyahaṅkāro buddhiravyaktameva ca indriyāṇi daśaikaṃ ca pañca cendriyagocarāḥ

१३.६अध्याय १३ · क्षेत्रक्षेत्रज्ञविभागयोग३५ में से श्लोक ६

अनुवाद

(पृथिवी आदि पाँच स्थूल) महाभूत, अहंकार, बुद्धि (महान), अव्यक्त (प्रकृति), दश (सूक्ष्म) इन्द्रियाँ और एक (मन); तथा (पाँच) इन्द्रियों के पाँच (शब्द, स्पर्श, रूप, रस और गन्ध – से सूक्ष्म) विषय,

— Lokmanya Tilak

अध्याय १३, श्लोक १३.६