मूल श्लोक
यदा भूतपृथग्भावमेकस्थमनुपश्यति ।तत एव च विस्तारं ब्रह्म संपद्यते तदा ॥
लिप्यंतरण (रोमन)
yadā bhūtapṛthagbhāvamekasthamanupaśyati tata eva ca vistāraṃ brahma saṃpadyate tadā
अनुवाद
जब सब भूतों का पृथक्त्व अर्थात् नानात्व एकता से (दीखने लगे), और इस (एकता) से ही (सब) विस्तार दीखने लगे, तब ब्रह्म प्राप्त होता है।
टिप्पणी
अब बतलाते है कि आत्मा निर्गुण, अलिप्त और अक्रिय कैसे है –
— Lokmanya Tilak