मूल श्लोक
सर्वतः पाणिपादं तत्सर्वतोऽक्षिशिरोमुखम् ।सर्वतः श्रुतिमल्लोके सर्वमावृत्य तिष्ठति ॥
लिप्यंतरण (रोमन)
sarvataḥ pāṇipādaṃ tatsarvato'kṣiśiromukham sarvataḥ śrutimalloke sarvamāvṛtya tiṣṭhati
अनुवाद
उसके सब ओर हाथ-पैर है; सब ओर आँखें, सिर और मुँह है; सब ओर कान है; और वही इस लोक में सब को व्याप रहा है।