मूल श्लोक
श्रीभगवानुवाच ।मय्यावेश्य मनो ये मां नित्ययुक्ता उपासते ।श्रद्धया परयोपेतास्ते मे युक्ततमा मताः ॥
लिप्यंतरण (रोमन)
śrībhagavānuvāca mayyāveśya mano ye māṃ nityayuktā upāsate śraddhayā parayopetāste me yuktatamā matāḥ
अनुवाद
श्रीभगवान ने कहा: मुझमें मन लगा कर सदा युक्तचित्त हो करके परम श्रद्धा से जो मेरी उपासना करते है, वे मेरे मत में सब से उत्तम युक्त अर्थात् योगी हैं।