मूल श्लोक
अभ्यासेऽप्यसमर्थोऽसि मत्कर्मपरमो भव ।मदर्थमपि कर्माणि कुर्वन्सिद्धिमवाप्स्यसि ॥
लिप्यंतरण (रोमन)
abhyāse'pyasamartho'si matkarmaparamo bhava madarthamapi karmāṇi kurvansiddhimavāpsyasi
अनुवाद
यदि अभ्यास करने में भी तू असमर्थ हो तो मदर्थ अर्थात् मेरी प्राप्ति के अर्थ (शास्त्रों में बतलाते हुए ज्ञान-ध्यान-भजन-पूजा-पाठ आदि) कर्म करता जा; मदर्थ (ये) कर्म करने से भी तू सिद्धि पावेगा;