मूल श्लोक
सञ्जय उवाच ।एवमुक्त्वा ततो राजन् महायोगेश्वरो हरिः ।दर्शयामास पार्थाय परमं रूपमैश्वरम् ॥
लिप्यंतरण (रोमन)
sañjaya uvāca evamuktvā tato rājan mahāyogeśvaro hariḥ darśayāmāsa pārthāya paramaṃ rūpamaiśvaram
अनुवाद
संजय ने कहा: फिर हे राजा धृतराष्ट्र! इस प्रकार कह करके योगों के ईश्वर हरि ने अर्जुन को (अपना) श्रेष्ठ ईश्वरी रूप अर्थात् विश्वरूप दिखलाया।