मूल श्लोक
अनेकवक्त्रनयनमनेकाद्भुतदर्शनम् ।अनेकदिव्याभरणं दिव्यानेकोद्यतायुधम् ॥
लिप्यंतरण (रोमन)
anekavaktranayanamanekādbhutadarśanam anekadivyābharaṇaṃ divyānekodyatāyudham
अनुवाद
उसके अर्थात् विश्वरूप के अनेक मुख और नेत्र थे, और उसमें अनेक अद्भुत दृश्य देख पड़ते थे, उस पर अनेक प्रकार के दिव्य अलंकार थे और उस में नाना प्रकार के दिव्य आयुध सज्जि त थे।