मूल श्लोक
सखेति मत्वा प्रसभं यदुक्तम्हे कृष्ण हे यादव हे सखेति ।अजानता महिमानं तवेदम्मया प्रमादात्प्रणयेन वापि ॥
लिप्यंतरण (रोमन)
sakheti matvā prasabhaṃ yaduktam he kṛṣṇa he yādava he sakheti ajānatā mahimānaṃ tavedam mayā pramādātpraṇayena vāpi
अनुवाद
तुम्हारी इस महिमा को बिना जाने, मित्र समझ कर प्यार से या भूल से 'अरे कृष्णा,' 'ओ यादव,' 'हे सखा,' इत्यादि जो कुछ मैंने कह डाला हो,