मूल श्लोक
तस्मात्त्वमुत्तिष्ठ यशो लभस्व जित्वा शत्रून्भुङ्क्ष्व राज्यं समृद्धम् ।मयैवैते निहताः पूर्वमेव निमित्तमात्रं भव सव्यसाचिन् ॥
लिप्यंतरण (रोमन)
tasmāttvamuttiṣṭha yaśo labhasva jitvā śatrūnbhuṅkṣva rājyaṃ samṛddham mayaivaite nihatāḥ pūrvameva nimittamātraṃ bhava savyasācin
अनुवाद
अतएव तू उठ, यश प्राप्त कर, और शत्रुओं को जीत करके समृद्ध राज्य का उपभोग कर। मैंने इन्हें पहले ही मार डाला है; (इसलिए अब) हे सव्यसाची (अर्जुन)! तू केवल निमित्त के लिए (आगे) हो!