मूल श्लोक
यथा प्रदीप्तं ज्वलनं पतङ्गाःविशन्ति नाशाय समृद्धवेगाः ।तथैव नाशाय विशन्ति लोका-स्तवापि वक्त्राणि समृद्धवेगाः ॥
लिप्यंतरण (रोमन)
yathā pradīptaṃ jvalanaṃ pataṅgāḥ viśanti nāśāya samṛddhavegāḥ tathaiva nāśāya viśanti lokā- stavāpi vaktrāṇi samṛddhavegāḥ
अनुवाद
जलती हुई अग्नि में मरने के लिए बड़े वेग से जिस प्रकार पतंग कूदते हैं, वैसे ही तुम्हारे भी अनेक जबड़ों में (ये) लोग मरने के लिए बड़े वेग से प्रवेश कर रहे हैं।