मूल श्लोक
द्यूतं छलयतामस्मि तेजस्तेजस्विनामहम् ।जयोऽस्मि व्यवसायोऽस्मि सत्त्वं सत्त्ववतामहम् ॥
लिप्यंतरण (रोमन)
dyūtaṃ chalayatāmasmi tejastejasvināmaham jayo'smi vyavasāyo'smi sattvaṃ sattvavatāmaham
अनुवाद
मैं छलियों में द्यूत हूँ, तेजस्वियों का तेज, (विजयशाली पुरुषों का) विजय, (निश्चयी पुरुषों का) निश्चय और सत्त्वशीलों का सत्त्व मैं हूँ।