मूल श्लोक
आहुस्त्वामृषयः सर्वे देवर्षिर्नारदस्तथा ।असितो देवलो व्यासः स्वयं चैव ब्रवीषि मे ॥
लिप्यंतरण (रोमन)
āhustvāmṛṣayaḥ sarve devarṣirnāradastathā asito devalo vyāsaḥ svayaṃ caiva bravīṣi me
अनुवाद
(10.12–13) अर्जुन ने कहा: तुम ही परम ब्रह्म, श्रेष्ठ स्थान और पवित्र वस्तु हो; सब ऋषि, ऐसे ही देवर्षि नारद, असित, देवल और व्यास भी तुमको दिव्य एवं शाश्वत पुरुष, आदिदेव, अजन्मा, सर्वि भु अर्थात् सर्व्यापी कहते हैं, और स्वयं तुम भी मुझसे वही कहते हो।