मूल श्लोक
तस्य सञ्जनयन्हर्षं कुरुवृद्धः पितामहः ।सिंहनादं विनद्योच्चैः शङ्खं दध्मौ प्रतापवान् ॥
लिप्यंतरण (रोमन)
tasya sañjanayanharṣaṃ kuruvṛddhaḥ pitāmahaḥ siṃhanādaṃ vinadyoccaiḥ śaṅkhaṃ dadhmau pratāpavān
अनुवाद
(इतने में) दुर्योधन को हर्षाते हुए प्रतापशाली वृद्ध कौरव पितामह (सेनापति भीष्म) ने सिंह की ऐसी बड़ी गर्जना कर (लड़ाई की सलामी के लिए) अपना शंख फूँका।