भगवद्गीता

श्रीमद्भगवद्गीता ५.४ ·

English

मूल श्लोक

साङ्ख्ययोगौ पृथग्बालाः प्रवदन्ति न पण्डिताः ।एकमप्यास्थितः सम्यगुभयोर्विन्दते फलम् ॥

लिप्यंतरण (रोमन)

sāṅkhyayogau pṛthagbālāḥ pravadanti na paṇḍitāḥ ekamapyāsthitaḥ samyagubhayorvindate phalam

५.४अध्याय ५ · संन्यासयोग२९ में से श्लोक ४

अनुवाद

मूर्ख लोग कहते है कि सांख्य (कर्मसंन्यास) और योग (कर्मयोग) भिन्न-भिन्न है; परन्तु पण्डित लोग ऐसा नहीं कहते। किसी भी एक मार्ग की भली-भाँति आचरण करने से दोनों का फल मिल जाता है।

— Lokmanya Tilak

अध्याय ५, श्लोक ५.४