मूल श्लोक
लभन्ते ब्रह्मनिर्वाणमृषयः क्षीणकल्मषाः ।छिन्नद्वैधा यतात्मानः सर्वभूतहिते रताः ॥
लिप्यंतरण (रोमन)
labhante brahmanirvāṇamṛṣayaḥ kṣīṇakalmaṣāḥ chinnadvaidhā yatātmānaḥ sarvabhūtahite ratāḥ
अनुवाद
जिन ऋषियों की द्वन्द्वबुद्धि छूट गई है अर्थात् जिन्होंने इस तत्त्व को जान लिया है, कि सब स्थानों पर एक ही परमेश्वर है, जिनके पाप नष्ट हो गए हैं और जो आत्मसंयम से सब प्राणियों का हित करने में रत हो गए है, उन्हें वह ब्रह्मनिर्वाणरूप मोक्ष मिलता है।