मूल श्लोक
विविक्तसेवी लघ्वाशी यतवाक्कायमानसः ।ध्यानयोगपरो नित्यं वैराग्यं समुपाश्रितः ॥
लिप्यंतरण (रोमन)
viviktasevī laghvāśī yatavākkāyamānasaḥ dhyānayogaparo nityaṃ vairāgyaṃ samupāśritaḥ
अनुवाद
'विविक्त' अर्थात् चुने हुए अथवा एकान्त स्थल में रहनेवाला, मिताहारी, काया-वाचा और मन को वश में रखने वाला, नित्य ध्यानयुक्त और विरक्त,