भगवद्गीता

श्रीमद्भगवद्गीता १६.२४ ·

English

मूल श्लोक

तस्माच्छास्त्रं प्रमाणं ते कार्याकार्यव्यवस्थितौ ।ज्ञात्वा शास्त्रविधानोक्तं कर्म कर्तुमिहार्हसि ॥

लिप्यंतरण (रोमन)

tasmācchāstraṃ pramāṇaṃ te kāryākāryavyavasthitau jñātvā śāstravidhānoktaṃ karma kartumihārhasi

१६.२४अध्याय १६ · दैवासुरसम्पद्विभागयोग२४ में से श्लोक २४

अनुवाद

इस लिए कार्य-अकार्य-व्यवस्थिति का अर्थात् कर्तव्य और अकर्तव्य का निर्णय करने के लिए तुझे शास्त्रों का प्रमाण मानना चाहिए। और शास्त्रों में जो कुछ कहा है, उसको समझ कर, तदनुसार इस लोक में कर्म करना तुझे उचित है।

— Lokmanya Tilak

टिप्पणी

इस श्लोक के 'कार्याकार्यव्यवस्थि ति' पद से स्पष्ट होता है, कि कर्तव्य-शास्त्र की अर्थात् नीतिशास्त्र की कल्पना को दृष्टि के आगे रख कर गीता का उपदेश किया गया है। गीतारहस्य (पृ. 48 – 50) में स्पष्ट कर दिखला दिया है कि इसी को कर्मयोगशास्त्र कहते है।

— Lokmanya Tilak

अध्याय १६, श्लोक १६.२४