भगवद्गीता

श्रीमद्भगवद्गीता १६.२० ·

English

मूल श्लोक

आसुरीं योनिमापन्ना मूढा जन्मनि जन्मनि ।मामप्राप्यैव कौन्तेय ततो यान्त्यधमां गतिम् ॥

लिप्यंतरण (रोमन)

āsurīṃ yonimāpannā mūḍhā janmani janmani māmaprāpyaiva kaunteya tato yāntyadhamāṃ gatim

१६.२०अध्याय १६ · दैवासुरसम्पद्विभागयोग२४ में से श्लोक २०

अनुवाद

हे कौन्तेय! (इस प्रकार) जन्म-जन्म में आसुरी योनि को ही पा कर, ये मूर्ख लोग मुझे बिना पाए ही अन्त में अत्यन्त अधोगति को जा पहुँचते है।

— Lokmanya Tilak

टिप्पणी

आसुरी लोगों का और उनको मिलने वाली गति का वर्णन हो चुका। अब इससे छुटकारा पाने की युक्ति बतलाते है –

— Lokmanya Tilak

अध्याय १६, श्लोक १६.२०