मूल श्लोक
श्रीभगवानुवाच ।अभयं सत्त्वसंशुद्धिर्ज्ञानयोगव्यवस्थितिः ।दानं दमश्च यज्ञश्च स्वाध्यायस्तप आर्जवम् ॥
लिप्यंतरण (रोमन)
śrībhagavānuvāca abhayaṃ sattvasaṃśuddhirjñānayogavyavasthitiḥ dānaṃ damaśca yajñaśca svādhyāyastapa ārjavam
अनुवाद
श्रीभगवान ने कहा: अभय (निडर), शुद्ध सात्त्विक वृत्ति, ज्ञान-योग व्यवस्थिति अर्थात् ज्ञान (-मार्ग) और (कर्म-) योग की तारतम्य से व्यवस्था, दान, दम, यज्ञ, स्वाध्याय अर्थात् स्वधर्म के अनुसार आचरण, तप, सरलता,