मूल श्लोक
पश्यादित्यान्वसून्रुद्रानश्विनौ मरुतस्तथा ।बहून्यदृष्टपूर्वाणि पश्याश्चर्याणि भारत ॥
लिप्यंतरण (रोमन)
paśyādityānvasūnrudrānaśvinau marutastathā bahūnyadṛṣṭapūrvāṇi paśyāścaryāṇi bhārata
अनुवाद
यह देखो (बारह आदित्य, (आठ) वसु, (ग्यारह) रुद्र, (दो) अश्विनीकुमार, और (49) मरुद्गण। हे भारत! ये अनेक आश्चर्य देखो, कि जो पहले कभी भी न देखे होंगे।
टिप्पणी
नारायणीय धर्म में नारद को जो विश्वरूप दिखलाया गया है, उसमें यह विशेष वर्णन है, कि बाई ओर बारह आदित्य, सम्मुख आठ वसु, दहिनी और ग्यारह रुद्र और पिछली ओर दो अश्विनीकुमार थे (शां॰ 339.50 – 52)। परन्तु कोई आवश्यकता नहीं, कि यही वर्णन सर्वत्र विवक्षित हो (देखो मभा॰ उ॰ 130)। आदित्य, वसु, रुद्र, अश्विनीकुमार और मरुद्गण ये वैदिक देवता हैं; और देवताओं के चातुर्वर्ण्य का भेद महाभारत (शां॰ 208.23 – 24) में यों बतलाया है, कि आदित्य क्षत्रिय हैं, मरुद्गण वैश्य हैं; और अश्विनीकुमार शूद्र हैं। देखो शतपथ ब्राह्मण 14.4.2.23
— Lokmanya Tilak