भगवद्गीता

श्रीमद्भगवद्गीता ११.६ ·

English

मूल श्लोक

पश्यादित्यान्वसून्रुद्रानश्विनौ मरुतस्तथा ।बहून्यदृष्टपूर्वाणि पश्याश्चर्याणि भारत ॥

लिप्यंतरण (रोमन)

paśyādityānvasūnrudrānaśvinau marutastathā bahūnyadṛṣṭapūrvāṇi paśyāścaryāṇi bhārata

११.६अध्याय ११ · विश्वरूपदर्शनयोग५५ में से श्लोक ६

अनुवाद

यह देखो (बारह आदित्य, (आठ) वसु, (ग्यारह) रुद्र, (दो) अश्विनीकुमार, और (49) मरुद्गण। हे भारत! ये अनेक आश्चर्य देखो, कि जो पहले कभी भी न देखे होंगे।

— Lokmanya Tilak

टिप्पणी

नारायणीय धर्म में नारद को जो विश्वरूप दिखलाया गया है, उसमें यह विशेष वर्णन है, कि बाई ओर बारह आदित्य, सम्मुख आठ वसु, दहिनी और ग्यारह रुद्र और पिछली ओर दो अश्विनीकुमार थे (शां॰ 339.50 – 52)। परन्तु कोई आवश्यकता नहीं, कि यही वर्णन सर्वत्र विवक्षित हो (देखो मभा॰ उ॰ 130)। आदित्य, वसु, रुद्र, अश्विनीकुमार और मरुद्गण ये वैदिक देवता हैं; और देवताओं के चातुर्वर्ण्य का भेद महाभारत (शां॰ 208.23 – 24) में यों बतलाया है, कि आदित्य क्षत्रिय हैं, मरुद्गण वैश्य हैं; और अश्विनीकुमार शूद्र हैं। देखो शतपथ ब्राह्मण 14.4.2.23

— Lokmanya Tilak

अध्याय ११, श्लोक ११.६