मूल श्लोक
वायुर्यमोऽग्निर्वरुणः शशाङ्कः प्रजापतिस्त्वं प्रपितामहश्च ।नमो नमस्तेऽस्तु सहस्रकृत्वः पुनश्च भूयोऽपि नमो नमस्ते ॥
लिप्यंतरण (रोमन)
vāyuryamo'gnirvaruṇaḥ śaśāṅkaḥ prajāpatistvaṃ prapitāmahaśca namo namaste'stu sahasrakṛtvaḥ punaśca bhūyo'pi namo namaste
अनुवाद
वायु, यम, अग्नि , वरुण, चन्द्र, प्रजापति अर्थात् ब्रह्मा और परदादा भी तुम्हीं हो। तुम्हें हजार बार नमस्कार है! और फिर भी तुम्हीं को नमस्कार है!
टिप्पणी
ब्रह्मा से मरीचि आदि सात मानस पुत्र उत्पन्न हुए और मरीचि से कश्यप तथा कश्यप से सब प्रजा उत्पन्न हुई है (मभा॰ आदि. 65.11); इसलिए इन मरीचि आदि को ही प्रजापति कहते हैं (शां॰ 340.65)। इसी से कोई-कोई प्रजापति शब्द का अर्थ कश्यप आदि प्रजापति करते हैं। परन्तु यहाँ प्रजापति शब्द एकवचनान्त है, इस कारण प्रजापति का अर्थ ब्रह्मदेव ही अधिक ग्राह्य देख पड़ता है; इसके अतिरिक्त ब्रह्मा, मरीचि आदि के पिता अर्थात् सब के पितामह (दादा) हैं, अतः आगे का 'प्रपितामह' (परदादा) पद भी आप ही आप प्रगट होता है, और उसकी सार्थकता व्यक्त हो जाती है।
— Lokmanya Tilak