भगवद्गीता

श्रीमद्भगवद्गीता ११.३९ ·

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मूल श्लोक

वायुर्यमोऽग्निर्वरुणः शशाङ्कः प्रजापतिस्त्वं प्रपितामहश्च ।नमो नमस्तेऽस्तु सहस्रकृत्वः पुनश्च भूयोऽपि नमो नमस्ते ॥

लिप्यंतरण (रोमन)

vāyuryamo'gnirvaruṇaḥ śaśāṅkaḥ prajāpatistvaṃ prapitāmahaśca namo namaste'stu sahasrakṛtvaḥ punaśca bhūyo'pi namo namaste

११.३९अध्याय ११ · विश्वरूपदर्शनयोग५५ में से श्लोक ३९

अनुवाद

वायु, यम, अग्नि , वरुण, चन्द्र, प्रजापति अर्थात् ब्रह्मा और परदादा भी तुम्हीं हो। तुम्हें हजार बार नमस्कार है! और फिर भी तुम्हीं को नमस्कार है!

— Lokmanya Tilak

टिप्पणी

ब्रह्मा से मरीचि आदि सात मानस पुत्र उत्पन्न हुए और मरीचि से कश्यप तथा कश्यप से सब प्रजा उत्पन्न हुई है (मभा॰ आदि. 65.11); इसलिए इन मरीचि आदि को ही प्रजापति कहते हैं (शां॰ 340.65)। इसी से कोई-कोई प्रजापति शब्द का अर्थ कश्यप आदि प्रजापति करते हैं। परन्तु यहाँ प्रजापति शब्द एकवचनान्त है, इस कारण प्रजापति का अर्थ ब्रह्मदेव ही अधिक ग्राह्य देख पड़ता है; इसके अतिरिक्त ब्रह्मा, मरीचि आदि के पिता अर्थात् सब के पितामह (दादा) हैं, अतः आगे का 'प्रपितामह' (परदादा) पद भी आप ही आप प्रगट होता है, और उसकी सार्थकता व्यक्त हो जाती है।

— Lokmanya Tilak

अध्याय ११, श्लोक ११.३९